पानी केवल प्रयासों से मिलेगा, बातों से नहीं। पानी किसी चुनाव का अजेंडा नहीं हो सकता क्योंकि पानी सरकार या जनप्रतिनिधि नहीं बनाते, उसके लिए जमीनी और जनसामान्य के प्रयास महत्वपूर्ण हैं। जमीन में पानी की फसल लगाओगे तो ही वो हमारे चेहरों पर लहलहाती नज़र आएगी। एक दिन का शोर हमें केवल याद दिलाता है कि हमें क्या करना है लेकिन जरूरी ये है कि हम हर पल याद रखें कि पानी केवल हमारी मेहनत मांगता है, हवाई बातें नहीं...। सच केवल इतना है कि हमें पानी को जीवन में कर्म का हिस्सा बनाना होगा...। हम अब तक केवल पानी को उथले तौर पर जी रहे हैं, वो नहीं मिलेगा, पानी पर पानीदार होना होगा, वरना पीढियां सूख जाएंगी और बेबस से कसूरवार से खड़े होंगे..।