जड़ों को देख पाना आसान नहीं होता, हम तो केवल महसूस कर लें....। कल एक पौधे को गमले से निकाल कर फैंका गया होगा... मेरी उस पर नजर ठहर गई...। जड़ों से रिश्ता क्या होता है और कितना गहरा होता है कुछ हद तक जान पाया...। सोचता हूँ जब एक छोटे पौधे की जड़ें इतनी घनी और सघन हैं तो आदमियत की जड़ें, मानवीयता की जड़ें, भरोसे की जड़ें और भी बहुत है जिनकी जड़ें गहरी हैं...। हम तो केवल ऊपर के सौंदर्य को देखने के आदी हैं, जड़ें कोई देखता ही कहां है और सीधा तर्क ये कि उसमें ऐसा होता ही क्या है, उलझनों और बदसूरती के अलावा... । मैं काफी देर बैठा रहा उस जड़ के पास...अंदर से जड़ होता रहा, विचारों और मानव की उलझनों में जड़ता को उलझता देख...। ओह ये जड़ें और हमारा समझदार हो जाना कितना अंतर है, कितना कुछ छीन कर ले गई ये समझदारी हमसे... इससे तो नादान ही भले थे...।